धर्म

चनपटिया का मोहर्रम झांकी एवं स्व•मौलाना हारून

शकील अहमद की रिपोर्ट
इमाम हुसैन एवं कर्बला के शहीदों को याद करते हुए मुसलमान मोहर्रम का त्यौहार मनाते हैं एवं उस दिन ताज़िया निकालते हैं और बड़े बड़े जुलुस की शक्ल में झण्डों के साथ या अली या हुसैन की नारों की गोंज सुनाई देती है । मगर आजकल थोड़ा सा रूप बदला हुवा है । आज एक बार फिर से ऐसे ही नज़ारा चनपटिया प•चंपारण में देखने को मिला । चनपटिया पुराना बिजली ऑफिस अखाड़ा का अपना एक अलग रिवायत रही है मोहर्रम के मातमी जुलुस में हर वर्ष एक सन्देश के साथ झांकी भी निकाली जाती है । और हर बार कुछ नया सन्देश अपने झांकी के माध्यम से देश वासियों को पहुंचाने का कार्य किया जाता है । अगले ही दिन 2 अक्टूबर है गांधी जयंती तो गांधी जी को याद करना भी स्वभाविक था ।
गांधी जी की झांकी के साथ एक झांकी ऐसी थी की जिस ने भी देखा अपने आंसू रोक न पाया वो था चनपटिया को अपनी सारी उम्र देकर अपनी अंतिम सांस तक हिन्दू मुस्लिम एकता का मिसाल कहे जाने वाले कवि ,साहित्यकार स्वर्गीय मौलाना हारून क़मर रेयाज़ी का वो व्यक्ति जिसने अपना सब कुछ समर्पित और परिवारिक त्याग चनपटिया वासियों के लिए करदिया था । आज भले वो इस दुन्या में नहीं हैं परन्तु उनके लिए स्नेह प्रेम देख हर कोई प्रशंसा कर रहा था और एक बार ज़रूर याद कर रहा था की काश वो आज हमारे बिच ज़िंदा होते ।मगर कुछ यादें ऐसी होती हैं जो हर समय कसक और टीस बनकर हमारे एहसास को ज़िंदा करती रहती है ।

इस इतिहासिक झांकी की प्रस्तुति का सारा श्रेह साहिल आर्ट के सुपुत्र राजा मोबाइल को गया एवं सहयोग के लिए नेयाज कुरैशी,शफीक कुरैशी,लालबाबू कुरैशी,रेयाज़ कुरैशी अदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।

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